असम में बाढ़ से दिन पर दिन बदतर हुए हालात : अब तक 25 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, वायु सेना मोर्चे पर डटी
राज्य के अब तक बाढ़ की वजह से लगभग 25 लाख लोग प्रभावित है। हालांकि, कुछ इलाकों में नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित कछार जिले के सिलचर का दौरा किया।
असम में बाढ़ के हालात दिन पर दिन बिगड़ते जा रहे हैं। रविवार को भी हालत बुरे ही रहे। राज्य के अब तक बाढ़ की वजह से लगभग 25 लाख लोग प्रभावित है। हालांकि, कुछ इलाकों में नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित कछार जिले के सिलचर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बराक घाटी शहर में हुए नुकसान का जायजा लिया।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, राज्य के 27 बाढ़ प्रभावित जिलों में 25 लाख से अधिक लोग अभी भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। पिछले दो सप्ताह से बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे पूर्वोत्तर राज्य के 637 राहत शिविरों में 2.33 लाख लोगों ने शरण ले रखी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), दमकल और आपातकालीन सेवाएं, पुलिस और एएसडीएमए स्वयंसेवक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित निकालने में जिला प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
बुलेटिन में कहा गया है कि विभिन्न एजेंसियों ने अब तक 67,237 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।असम के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ के कारण शनिवार को चार और लोगों की मौत हो गई, जिससे राज्य में इस साल बाढ़ और भूस्खलन में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 121 हो गई है।
एएसडीएमए ने कहा कि कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले से ताज़ा भूस्खलन की सूचना मिली है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में औसतन सात मिमी बारिश हुई है। केंद्रीय जल आयोग के बुलेटिन के मुताबिक, नगांव के धरमतुल में कोपिली नदी, करीमगंज में बीपी घाट पर बराक और कछार में एपी घाट तथा करीमगंज शहर में इसकी सहायक कुशियारा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
वायु सेना मोर्चे पर डटी : असम और मेघालय में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए भारतीय वायु सेना मोर्चे पर डटी हुई है। वायुसेना ने शनिवार को कम से कम 96 टन राहत सामग्री को एयरलिफ्ट किया। IAF ने ट्वीट किया कि असम-मेघालय में राहत और सहायता प्रदान करने के 25 जून को विभिन्न हवाई प्लेटफॉर्मों का उपयोग करके 96 टन राहत सामग्री को 46 उड़ानों में 37 घंटे तक उड़ाया है।


