शहर में कोरोना के बाद वायरल का कहर टूटा:वायरल और फ्लू के हर मरीज की हो रही है जांच, तेजी से गिर रही है, वायरल के मरीजों की प्लेटलेट्स

हैलट में सिर्फ कानपुर शहर के नहीं बल्कि शहर के आसपास बने जिलों से भी मरीज आते है। हैलट अस्पताल में अब तक करीब 32 मरीजों को डेंगू, मलेरिया और वायरल के चलते एडमिट करने की सलाह डॉक्टरों ने दी है।

शहर में कोरोना के बाद वायरल का कहर टूटा:वायरल और फ्लू के हर मरीज की हो रही है जांच, तेजी से गिर रही है, वायरल के मरीजों की प्लेटलेट्स
कानपुर में सोमवार को हैलट अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर परचा बनवाने के लिए उमस भरी गर्मी खड़े मरीज और तीमारदार।

कानपुर शहर में डेंगू, वायरल और मलेरिया के मरीजों की संख्या में एकदम से इजाफा हुआ है। सोमवार को हैलट ओपीडी में दोपहर 1 बजे तक 1698 से ज्यादा नए पर्चे बन चुके थे। इसमें वायरल, डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों के पर्चे ज्यादा थे। हैलट में सिर्फ कानपुर शहर के नहीं बल्कि शहर के आसपास बने जिलों से भी मरीज आते है। हैलट अस्पताल में अब तक करीब 32 मरीजों को डेंगू, मलेरिया और वायरल के चलते एडमिट करने की सलाह डॉक्टरों ने दी है। मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ ऋचा गिरी ने बताया, अभी तक अस्पताल में वायरल के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। इन मरीजों में एक से दो दिन के भीतर प्लेटलेट्स में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। आपको बताते चले इसी साल मार्च के महीने में डेंगू से अब तक एक बच्ची की मौत हो चुकी है और पिछले चार दिनों में करीब 08 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है।

क्यों बढ़ रहे है मरीज : हैलट में मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण मौसम में हो रहा बदलाव है। पिछले दो दिनों से धूप के साथ साथ उमस ने भी बढ़ गई है। हैलट के मेडिसिन विभाग की हेड डॉ ऋचा गिरी ने बताया, हैलट में फ्लू, खांसी-बुखार, सांस,उल्टी-दस्त के साथ वायरल के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे है। ऐसी स्थिति में हैलट अस्पताल के मेडिसिन विभाग के चारों वार्ड के 220 बेड मरीजों से भरे हुए है। नौबत यह है कि एक बेड पर दो मरीजों को रखना पड़ रहा है, क्योंकि हम इन मरीजों को किसी दूसरे वार्ड में भी नहीं रख सकते है। इससे संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ जाएगा है। अगर ज़रुरत पड़ेगी तो हम अन्य वार्डों में भी जगह बना कर मरीजों को भर्ती कर सकते है। भर्ती हो रहे हर मरीज की जांच की जा रही है, साथ ही ज़रूरत पड़ने पर सैंपलिंग और सिक्वेंसिंग के लिए सैंपल लखनऊ भी भेजे जा रहे है।

पिछले साल डेंगू और बुखार से गई थी कई लोगों की जाने : आपको बता दें पिछले साल कल्याणपुर के कुरसौली गांव में कई लोगों की जाने डेंगू और विचित्र बुखार से चली गई थी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन आखिरी तक यह पता लगाने में असमर्थ था कि जिन मरीजों की मौत हो रही है उनको कौन सी बीमारी है। इस वजह से इस बार मेडिकल कॉलेज प्रशासन कोई भी लापरवाही नहीं करना चाहता है। सीएमओ डॉ आलोक रंजन ने बताया, पिछली बार के आकड़ों को देखते हुए हम लोगों ने पहले से ही रणनीति बना ली है कि ऐसी बीमारियों से कैसे लड़ना है। नगर निगम को एक जुलाई को ही फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और अन्य दिशा निर्देश दे दिए गए थे। साथ ही मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को भी हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया गया था।